रविवार, 19 मई 2019

ghazal : उसके कूचें में जो ठहरने वाला था

उसके कूचें में जो ठहरने वाला था
वो मेरा अहबाब निखारने वाला था

उसको खुद में ढूंढ रहा हूँ मुद्दत से
वो तो मुझमे एक घर करने वाला था

ज़िन्दगी ने हर मोड़ पे चोटें दी लेकिन
में भी कहाँ आसानी से बिखरने वाला था

जाने उसके इश्क़ ने क्या कमाल किया
वरना में थोड़ी सुधरने वाला था

किस्मत भी उस रस्ते पर आ कर बैठी थी
जो रास्ता में छोड़ के चलने वाला था

गोया उसको याद भी मेरी आयी कब
जब में उसके इश्क़ में मरने वाला था

इश्क़ ने तुझको तब भी घेर लिया 'अख़्तर'
तू तो उस रस्ते से,बच के निकलने वाला था

AKHTAR PARWEZ DEHLVI

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