उसके कूचें में जो ठहरने वाला था
वो मेरा अहबाब निखारने वाला था
उसको खुद में ढूंढ रहा हूँ मुद्दत से
वो तो मुझमे एक घर करने वाला था
ज़िन्दगी ने हर मोड़ पे चोटें दी लेकिन
में भी कहाँ आसानी से बिखरने वाला था
जाने उसके इश्क़ ने क्या कमाल किया
वरना में थोड़ी सुधरने वाला था
किस्मत भी उस रस्ते पर आ कर बैठी थी
जो रास्ता में छोड़ के चलने वाला था
गोया उसको याद भी मेरी आयी कब
जब में उसके इश्क़ में मरने वाला था
इश्क़ ने तुझको तब भी घेर लिया 'अख़्तर'
तू तो उस रस्ते से,बच के निकलने वाला था
AKHTAR PARWEZ DEHLVI
वो मेरा अहबाब निखारने वाला था
उसको खुद में ढूंढ रहा हूँ मुद्दत से
वो तो मुझमे एक घर करने वाला था
ज़िन्दगी ने हर मोड़ पे चोटें दी लेकिन
में भी कहाँ आसानी से बिखरने वाला था
जाने उसके इश्क़ ने क्या कमाल किया
वरना में थोड़ी सुधरने वाला था
किस्मत भी उस रस्ते पर आ कर बैठी थी
जो रास्ता में छोड़ के चलने वाला था
गोया उसको याद भी मेरी आयी कब
जब में उसके इश्क़ में मरने वाला था
इश्क़ ने तुझको तब भी घेर लिया 'अख़्तर'
तू तो उस रस्ते से,बच के निकलने वाला था
AKHTAR PARWEZ DEHLVI
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें