मुंतजिर-ए-मदवा-ए-दिल-ए-बीमार बता कब तक करूं
मसीहा का इंतज़ार बता कब तक करूं
तू आज हमनशीं हुआ मुद्दातों बाद
में तेरा दीदार बता कब तक करूं
उसे पाना है तो बर्बाद होना पड़ता है
में खुद को मिस्मार बता कब तक करूं
आज खुद का ही सामना होगा मैदान में
में खुद को तैयार बता कब तक करूं
हुआ है इश्क़ मुझे ऐ बेखबर सुन ले
में इसका प्रचार बता कब तक करूं
तेरे पास तो चाहने वालों की फेहरिस्त है
में खुद को दावेदार बता कब तक करूं
कोई किरदार अख़्तर के निसिब में नहीं
मगर खुद को अदाकार बता कब तक करूं
AKHTAR PARWEZ DEHLVI
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें