उसका सुरूर मुझ पर सवार हो गया
मुझको हां मुझको-मुझको प्यार हो गया
लफ़्ज़ खुद बन गए इजहार हो गया
मुझको हां मुझको-मुझको प्यार हो गया
वो मेरी रातों में ख्वाब बन के आती है
अपनी अदाओं से मेरे दिल को चुराती है
ख्वाबों में उसका इंतज़ार हो गया
मुझको हां मुझको-मुझको प्यार हो गया
उसका वजूद उसका ही नाम आता है
एक अक्स दिखता है और फिर खो जाता है
वो मेरे हमराज मेरा यार हो गया
मुझको हां मुझको-मुझको प्यार हो गया
~ अख़्तर परवेज़ देहलवी