ऐ ज़िन्दगी या तो तू मलाल कर इस सवाल पर
या मुझे हक दे की थोड़ा गम मना लूं हाल पर
मैं तेरा आशिक़ हूं जानां और आशिक़ ज़ात भी
तू ज़रा नज़रें उठा दे अपने इस जमाल पर
ज़िन्दगी जी लें या फिर खुद-ख़ुशी अंज़ाम हो
मैं शब ओ रात सोचता बहुत हूं इस खयाल पर
तू बड़ा शायर बना फिरता है 'अख़्तर' क्या है तू?
चल तू पहले इक शेर ही कह दे मेरे इस हाल पर
~अख़्तर परवेज़ देहलवी