तुम वो आशिक़ पुराना चाहती हो ?
माने दर्द फिर जगाना चाहती हो ?
मेरी हर इक बात पर इख़्तिलाफ़ी
कोई रिश्ता बनाना चाहती हो ?
मेरे पास मैं खुद भी नहीं हूं
तुम किसको पाना चाहती हो ?
मेरे पास चंद आंसु और इक ग़म
तुम क्या लिखवाना चाहती हो ?
मैं तो इक दीवानी चाहता हूं
तुम भी इक दीवाना चाहती हो ?
'अख़्तर' को खुद से मोहब्बत भी नहीं
तुम 'अख़्तर' से दिल लगाना चाहती हो ?
Akhtar Parwez Dehlvi
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