हम तुम को इस क़दर देखें
तुम्हारे लब पे चश्म-तर देखें
ये तेरे शबनम ओ शबाब को
सारे दुनिया के सुखनवर देखें
तेरी चाहत को तेरी यादों को
हम देखें भी तो मुंतजर देखें
तेरे जिस्म-ए-मुनाव्वर को
चांदनी रातों में क़मर देखें
उसे किसी और का शेर पसंद आया है
हम अपनी ग़ज़लों को बे-असर देखें
इक ये बीमार-ए-इश्क़-ओ-मिजाज़
सारे दुनिया के चरागर देखें
'अख़्तर' तो अपने ख्वाबों में
बस तुम को देखे बेशतर देखे
~अख़्तर परवेज़ देहलवी
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