गुरुवार, 3 अक्टूबर 2019

ग़ज़ल: मुझ से पहले शराब मंगाई लोगों ने

मुझ से पहले शराब मंगाई लोगों ने
और मुझको इक घूंट न पिलाई लोगों ने

मैं तो उसके रूह का इक कैदी था
और मुझको दी है रिहाई लोगों ने

शाम सवेरे उसको मेरी याद आए
ऐसी मेरी की है बुराई लोगों ने

दिनभर दौड़ता रहता हूं जिस कागज़ पर
उस कागज़ में आग लगाई लोगों ने

वो ग़ज़ल थी मेरी और तू शायर था
'अख़्तर' को ये बात बताई लोगों ने

~अख़्तर परवेज़ देहलवी

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Ghazal

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