शुक्रवार, 29 नवंबर 2019

Ghazal

हश्र के दिन फिर तुझे भी आजमाया जाएगा 
और फिर आवाज़ दे के तुझे बुलाया जाएगा

मेरे खातिर तूने जो अश्क बहाए थे कभी
ये मेरा क़र्ज़ है मेरे खुं से चुकाया जाएगा 

अब मैं शर्मिंदा शर्मिंदा शर्मिंदा हूं
ऐसा मंजर देख कर बस मातम मनाया जाएगा

अब न बोला तू तो मर जाएगा अंदर से 'अख़्तर'
और अगर बोला तो सुली पर चढ़ाया जाएगा 

~अख़्तर परवेज़ देहलवी

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Ghazal

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