मंगलवार, 7 अप्रैल 2020

नज़्म

सुनो तुम बहुत खबसूरत हो
मुझे तुम अच्छे लगते हो

ये बात अलग है 
हम तुम में बात नहीं जादा होती 
कभी होती है 
अच्छी होती है 
सच्ची होती है 
अब जितनी होती है 
अच्छा लगता है 

ये कम है कि अब भी तुम  
मेरी बातों पर हंस देती हो
थोड़ी ही सही पर
बात मुझ से करती हो
जैसे करती हो 
हंस कर करती हो 
अच्छा लगता है 

~अख़्तर परवेज़ देहलवी


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