मैंने सूखन बस तुम पे लिखा हो ऐसा भी तो हो सकता है
तुम ने मुझको पागल किया हो ऐसा भी तो हो सकता है
तेरे हुस्न-ओ-जमाल को मैंने चांद-सितारे कह डाले
ये सब मैंने झूठ कहा हो ऐसा भी तो हो सकता है
अपने रक़ीब कि इतनी खुशी को देख के मैंने ये सोचा
वो भी तेरे पहलू से उठा हो ऐसा भी तो हो सकता है
माना 'अख़्तर' बे-कद्र सलीके वाला बे-हुनरी से राब्ता है
पर ये सब मैंने तुम से सीखा हो ऐसा भी तो हो सकता है
छुपते-छुपाते तेरी नज़रों से बज़्म में 'अख़्तर' आया हो
तुमने मुझको देख लिया हो ऐसा भी तो हो सकता है
~अख़्तर परवेज़ देहलवी
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