कभी तो आप सितमगरों की बात करें
कभी तो आप बे घरों की बात करें
हमारे हाथ में मोहब्बत कि किताबें हैं
और आप पथरों की बात करें
यहां पड़े है कितने लहू परिंदों के
और आप मंजरों की बात करें
तुम्हारे आंख का कतरा लहू है न ?
फिर क्यूं समुंदरों की बात करें ?
'अख़्तर' तेरे बस कहां नज़्म समझना
फिर भी चल सुख़न-वरों की बात करें
~अख़्तर परवेज़ देहलवी
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