तुमसे हम अपनी नज़रें मिलाएंगे किस तरह
तुम से हम दिल की बात बताएंगे किस तरह
तुमने जो दिल में आग लगा दी है ठीक है
लेकिन ये बताओ कि भूझाएंगे किस तरह
रस्ता तमाम मुझ को दिखाया है कोई और
ऐसे तुम्हारे घर में हम आएंगे किस तरह
हम ने भी मुस्कुरा के केह दिया सब ठीक है
अब दिल में लगे घाव दिखाएंगे किस तरह
हमने सुना है सब से वफा कर रहे हो तुम
ऐसे रकीब तुमको आजमाएंगे किस तरह
ये दर्द नुमा फन है तुम खुश नुमा वजूद
सुखंवरी तुम को सिखाएंगे किस तरह
'अख़्तर' तू इस बात पर नाराज़ न होना
पर तेरी ग़ज़ल पढ़ के होश में आएंगे किस तरह
अख़्तर परवेज़ देहलवी
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