बुधवार, 23 अक्टूबर 2013

Tarana-E-Zindagi

जब रातों की काली छाया मुझ पर सितम ढाती है 
जब चंचल सी प्यारी बोली मुझको  बहलाती है !!
जब सुखे पत्तों पर बारिस का पानी आकर ठहर  गया 
जब फूलों की खुशबू से पूरा गागर बहक गया !!
जब ममता भरी नजर ने अपनी खुशियों का बलिदान दिया 
फिर हमने उनकी बातों को प्यारा सा सम्मान किया !!
जब दिन रात की चिंता से हमरी हिम्मत टूट गयी 
फिर धीरे-2 हमसे सारी दुनिया रूठ गयी !!

जब कुछ करने का मन हमको कुछ देर के लिए जगाता है 
फिर अपनी सारी कमियों को वो धीरे से छिपाता है !!
जब अपनी ही तनहाइयों से हम उब जाते  हैं 
फिर अपनी दोस्तों की यादों से अपने दिल को बहलाते हैं !!
जब हमको  कोई अपना सा लगने लग जाता है 
बिन देखे  उस को एक पल चैन ना आता है !!
जब रात भर जागकर कुछ बातें की जाती हैं 
फिर क्लास मैं  पीछे बिठे-२ हलकी सी झपकी आ जाती है !!
प्यार-२ में हलकी फुलकी बातों में झराप  हो जाती है 
धोका देकर वो,हमको धोकेबाज़ बताती है!!
वो हमसे दूर होकर ,एक दिन हमसे छुट गयी 
फिर धीरे-२  हमसे सारी दुनिया रूठ गयी !!

धीरे-२ सब मिला फिर कुछ ना पास रहता है 
सारी दुनिया खुश रहती है वो उदास रहता है !!
जब धीरे-२ कुछ करने की इच्छा जाग जाती है 
मेरी किस्मत मुझसे रूठ, उठ कर भाग जाती है !!
फिर प्यारी-२ बातों से अपनी किस्मत को बहलाता हूँ 
तू तो मेरी जानेमन है ये उसको बतलाता हूँ !!
फिर वो मेरी ख़ुशी बने मेरे ऊपर कूद गयी 
फिर धीरे-२  हमसे सारी दुनिया रूठ गयी !!


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Ghazal

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