तू इतनी खूबसूरत क्यूं है
तेरी आंखों में केहकेशां छुपे रहते हैं
हम तो बस तेरी आंखों को देखा करते हैं
तेरी आंखों में खुद को ढूंढा करते हैं
उन आंखों में ये तोहमत क्यूं है
तू इतनी खूबसूरत क्यूं है
ख़्वाब तेरे कभी आए तो क्या बात बने
नींद तू भी तो उड़ाए तो क्या बात बने
चांद तुझसे रूठ जाए तो क्या बात बने
अगर ये आफ़त है तो आफ़त क्यूं है
तू इतनी खूबसूरत क्यूं है
शब में तेरी है सदा सुनाई देती है
आंखें जब बंद करें तू ही दिखाई देती है
और फिर आवाज़ दे के तू जगा देती है
अगर ये ज़हमत है तो ज़हमत क्यूं है
तू इतनी खूबसूरत क्यूं है
फूल भी तुझ को देख कर मुरझातें हैं
घटाएं तेरे गेसुओं से प्यास बुझातें हैं
चमन दूर से तुझे देखे कर शरमातें हैं
और तुझे इस बात से हैरत क्यूं है
तू इतनी खूबसूरत क्यूं है
~अख़्तर परवेज़ देहलवी
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