अब तो हिज्र में कोई अश्क फ़िशानी ही नहीं
जो वीरानी थी पहले वो वीरानी ही नहीं
अब तुझे छोड़ना ही है तो छोड़ दे मुझको
बात जब इतनी ही बिगड़ी है तो बनानी ही नहीं
अब तो किरदार भी मिल नहीं रहे हैं मुझे
लगता है उसके पास अब कोई कहानी ही नहीं
बात जो मैंने कही थी वही हक़ीक़त थी
बात वो उसने कभी मेरी मानी ही नहीं
उसकी नाकामियों पे यूँ न हसं तू अख़्तर
दश्त की खाक तूने अभी छानी ही नहीं
Akhtar Parwez Dehlvi
जो वीरानी थी पहले वो वीरानी ही नहीं
अब तुझे छोड़ना ही है तो छोड़ दे मुझको
बात जब इतनी ही बिगड़ी है तो बनानी ही नहीं
अब तो किरदार भी मिल नहीं रहे हैं मुझे
लगता है उसके पास अब कोई कहानी ही नहीं
बात जो मैंने कही थी वही हक़ीक़त थी
बात वो उसने कभी मेरी मानी ही नहीं
उसकी नाकामियों पे यूँ न हसं तू अख़्तर
दश्त की खाक तूने अभी छानी ही नहीं
Akhtar Parwez Dehlvi
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