मुझे ढूंढ कर मेरे हम नाशीन मुझे इल्म ए ज़ात नवाज़ दे
मैं इस दश्त में हूं नया नया मेरे सामने अहद ए बहार है
मेरी जां निसार तमन्ना हां मुझे आ के अहल ए ईजाज़ दे
मुझे हिम्मत ओ हौसला है नहीं बस बेचैनियों का ज़ख़ीरा हूं
तू ही आ के मेरे जान ए जां इस इश्क को तू आग़ाज़ दे
मुझे अपना तो कुछ पता नहीं मुझे होश इतना तो है मगर
तेरी ख़ुश नज़र का ख़्याल है इसी ख़ुश नज़र का एज़ाज़ दे
तेरे चाहने वालों में भी एक नाम हां 'अख़्तर' का है यकीं
अगर आस है तो यक़ीन कर गर नहीं यकीं तो आवाज़ दे
परवेज़ अख़्तर
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