यकीं तो कर लिया मगर एतिबार हो न सका
तेरे ही लम्स से मुझ को मिला क़रार ओ शकेब
तो तेरा जिस्म मुझे ना-गवार हो न सका
यकीं तो था की आएगा एक दिन वापिस
मुझ बदनसीब से ही इंतजार हो न सका
यही तो तजर्बा मुझ को रहा मोहब्बत में
बदन बदन से मिले इश्क प्यार हो न सका
ये चारागार अब मुझ को शराब ए इश्क पिला
तेरा इलाज तो अब बरक़रार हो न सका
परवेज़ अख़्तर
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