पर साथ न लेना तुम मेरा वरना तुम पछताओगे
मैंने पहले तुमसे कहा था अब क्यूं रोते पछताते हो
साथ न छोड़ूंगा मैं तुम्हारा जब तक हार न जाओगे
सच है ज़िंदा लोग हैं लेकिन मुर्दों जैसे रहते हैं
कोई नहीं आएगा बहर कितना शोर मचाओगे
ठीक है रोना अच्छा है पर इतना रोना ठीक नहीं
रोते रोते आंखें सूखी अब क्या लहू बहाओगे ?
तुम्हारे गेसू सावन जैसे बादल जैसी आंखें है
देख के ऐसा लगता है कि तुम बरखा बरसाओगे
देखो 'अख़्तर' बात कहूं मैं बोलना बहुत ज़रूरी है
तुम इतना जो चुप रहते हो तो कायर ही कहलाओगे
परवेज़ अख़्तर
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