मैं खोया रहता हूँ उसी के ख़्यालों में
हर दिन हाँ हर दिन उसे ढूंढ़ता हूँ किताबों में
वो तो एक रोग सा मुझे लगता जा रहा है
बचना बहुत मुश्किल ये लिपटा जा रहा हैं
मैं तो हाँ मैं तो उलझाता हूँ आपने सवालों में
खोया रहता हूँ उसी के ख़्यालों में
उसकी यादों के सहारे अब तो जीना है
एक पल अब एक पल चैन मुझको कहाँ हैं
उसका हां उसका अब अक्स दिखता है दिवारों में
खोया रहता हूँ उसी के ख़्यालों मैं
उसके दर्द को ख़ुद का दर्द बनता हुँ
दर्द के सफ़र पे ख़ुशियां ही खुशियाँ जुटाता हूँ
दर्द को हाँ ! दर्द को छुपाता हूँ खुशियों के सहारों में
खोया रहता हूँ उसी के ख़्यालों मैं
वो जो कहे तो चाँद को भी बुला दूँ
उसकी खवाइश पे खुद को भी मिटा दूँ
मैं तो हाँ ! मैं तो मिट जाउंगा उस की राहों में
खोया रहता हूँ उसी के ख़्यालों में
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