रविवार, 15 सितंबर 2013

Najakat-e-ishq


तेरा मुस्कुराता हुआ चेहरा देख लूँ तो मैं 
तेरी झुकती हुई पलके ज़रा देख लूँ तो मैं 

नजाकत में हसीं लग रही हो तुम 
 नजाकत को दिखाना देख लूँ तो मैं !!

इजहार-ए-इश्क करने मैं आगे बढ़ नहीं सकती 
आज तेरा पीछे हट जाना देख लूँ तो मैं !!

इन्तजार साकी का कर रही हो तुम 
आज तेरा इंतजार करना देख लूँ तो मैं !!

तेरे मेरे नाम में कुछ बात लगती है 
दोनों का नाम मिलके देख लूँ तो मैं !!

साकी ये मोहब्बत आसन कहाँ है 
अब इसे आसान बना के देख लूँ तो मैं !!

जो ज़ख्म दिए थे तूने वो उभर के आए हैं 
सारे ज़ख्मों को ज़रा सामैट लूँ तो मैं !!


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