मैं इस क़दर तबाह हुआ हूं कि क्या कहूं
में बर्बाद-ए-बादशाह हुआ हूं कि क्या कहूं
मेरे कत्ल का मेरे सर पर इल्ज़ाम है
में अपना खुद-गवाह हुआ हूं कि क्या कहूं
उसको गुनहगार पसंद है उसकी नजर में मैं
इस क़दर बे-गुनाह हुआ हूं कि क्या कहूं
'अख़्तर' के क़ातिल ने 'अख़्तर' के सुनाए शेर
जो मैं वहां वाह-वाह हुआ हूं कि क्या कहूं
AKHTAR PARWEZ DEHLVI
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