मेरी इक बात बहर-ए-खुदा मान ले साकी
पैमाना छोड़ तू आंखों से जान ले साकी
रहूं ना होश में कुछ इसक़दर पीला दे मुझे
फिर उसके बाद मेरे दिल का बयान ले साकी
पहले अपने एब को हुनर में तब्दील कर
फिर रफ्ता-रफ्ता अपनी उड़ान ले साकी
हुआ नाकाम तो मय खाने से निकाल देना मुझे
मगर उससे पहले मेरा इम्तिहान ले साकी
AKHTAR PARWEZ DEHLVI
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